डायवर्सन एवं व्यपवर्तन (Land Diversion) ⏱️ 6 मिनट पढ़ें 📅 अंतिम संशोधन: 2026-09-29

छत्तीसगढ़ में कृषि भूमि का डायवर्सन (व्यपवर्तन) कैसे कराएं? नियम, फीस एवं प्रक्रिया (CG Land Diversion)

खेत में मकान, दुकान, गोदाम या पेट्रोल पंप बनाने से पहले कृषि भूमि का डायवर्सन (व्यपवर्तन) कराना कानूनी रूप से अनिवार्य है। जानिए डायवर्सन की ऑनलाइन प्रक्रिया, फीस एवं आवश्यक नियम।

✅ प्रमुख बिंदु एवं त्वरित चेकलिस्ट (Key Takeaways)

  • लागू धारा: CG Land Revenue Code Section 172
  • सक्षम अधिकारी: अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (SDO Revenue)
  • उपयोग श्रेणियां: आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक
  • महत्व: वैध भवन निर्माण व होम लोन हेतु अनिवार्य

1. डायवर्सन (व्यपवर्तन) क्या होता है?

छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 172 के अनुसार, किसी भी कृषि प्रयोजन वाली भूमि को गैर-कृषि प्रयोजन (जैसे मकान बनाने, दुकान, गोदाम, राइस मिल, होटल, स्कूल या पेट्रोल पंप) में उपयोग करने के लिए राज्य शासन से अधिकृत अनुमति लेना व्यपवर्तन (Diversion) कहलाता है।

2. बिना डायवर्सन के निर्माण करने के गंभीर नुकसान

  • नगर तथा ग्राम निवेश (T&CP) और नगर पालिका/पंचायत से भवन निर्माण अनुमति (Building Permission) नहीं मिलती।
  • बैंक से गृह निर्माण ऋण (Home Loan) स्वीकृत नहीं होता।
  • राजस्व विभाग द्वारा अवैध उपयोग पर भारी जुर्माना (Penalty) और बेदखली की कार्रवाई की जा सकती है।

3. डायवर्सन के लिए आवश्यक दस्तावेज एवं प्रक्रिया

  1. चालू वर्ष का B-1 एवं P-II
  2. प्रमाणित खसरा नक्शा जिसमें प्रस्तावित डायवर्ट रकबा दर्शाया गया हो
  3. प्रस्तावित निर्माण का अभिन्यास (Layout Plan)
  4. कलेक्टर गाइडलाइन अनुसार निर्धारित प्रीमियम शुल्क व वार्षिक भू-भाटक का चालान
  5. अनुविभागीय अधिकारी (SDO Revenue) न्यायालय में ऑनलाइन आवेदन
  6. SDO द्वारा जांचोपरांत व्यपवर्तन आदेश (Diversion Certificate) जारी किया जाता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions)

क्या डायवर्सन कराने के बाद जमीन पर लगान बढ़ जाता है?

हाँ, कृषि भूमि पर नाममात्र का लगान होता है, जबकि डायवर्ट होने के बाद उपयोग के प्रकार (आवासीय या व्यावसायिक) के आधार पर शासन द्वारा निर्धारित वार्षिक भू-भाटक (Ground Rent) देय होता है।

⚖️
अचल संपदा विधिक एवं राजस्व अनुसंधान प्रकोष्ठ

यह लेख छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 एवं राज्य राजस्व विभाग के नवीनतम नियमों के आधार पर आम नागरिक की विधिक जागरूकता हेतु तैयार किया गया है।