जमीन खरीद से पहले आवश्यक सरकारी दस्तावेजों की जांच
छत्तीसगढ़ एवं मध्य भारत भू-राजस्व संहिता अनुसार किसी भी जमीन की रजिस्ट्री कराने या बयाना देने से पहले इन प्रमुख दस्तावेजों की प्रत्यक्ष जांच अवश्य करें।
अति महत्वपूर्ण चेतावनी: भू-राजस्व संहिता धारा १७०-ख (आदिवासी भूमि सुरक्षा नियम)
छत्तीसगढ़/मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता की धारा 170-ख के तहत, किसी भी अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के व्यक्ति की भूमि को बिना कलेक्टर की पूर्व वैधानिक अनुमति के गैर-आदिवासी को बेचना या अंतरित करना कानूनन शून्य और गैर-कानूनी है। रजिस्ट्री कराने से पूर्व खसरे के कॉलम १२ और पूर्व के रजिस्ट्री पत्रों में मूल स्वामी की जाति की पुष्टि आवश्यक रूप से करें।
खसरा बी-१ (Khasra B-1)
महत्व व उद्देश्य: भूमि का मुख्य खसरा रिकॉर्ड, जिसमें भूमि स्वामी का नाम, खसरा नंबर, रकबा और वर्तमान स्थिति दर्ज होती है।
भू-नक्शा / अक्स नक्शा (Cadastral Map Trace)
महत्व व उद्देश्य: सरकारी नक्शा जो जमीन की चौहद्दी, आकार और मुख्य रास्ते की स्थिति सिद्ध करता है।
ऋण पुस्तिका / किसान किताब (Kisan Kitab)
महत्व व उद्देश्य: सिद्ध करती है कि जमीन पर किसी बैंक या सहकारी समिति से ऋण बंधक नहीं है।
धारा १७०-ख आदिवासी भूमि सतर्कता (Section 170-B Check)
महत्व व उद्देश्य: छत्तीसगढ़/मध्य प्रदेश में अनुसूचित जनजाति (ST) की जमीन गैर-आदिवासी द्वारा बिना कलेक्टर की पूर्व अनुमति के नहीं खरीदी जा सकती।
किश्तबंदी खतौनी पी-२ (Kishtabandi P-II)
महत्व व उद्देश्य: खातावार सभी खसरों की सूची और भू-राजस्व (लगान) की अद्यतन स्थिति दर्शाती है।
नामांतरण पंजी नकल (Mutation Register Record)
महत्व व उद्देश्य: प्रमाणित करता है कि वर्तमान विक्रेता को यह जमीन कैसे प्राप्त हुई (पैतृक हिस्सा, रजिस्ट्री, या वसीयत)।
भारमुक्त प्रमाण पत्र (Non-Encumbrance Certificate - 12 से 30 वर्ष)
महत्व व उद्देश्य: प्रमाणित करता है कि पिछले 12 से 30 वर्षों में इस जमीन पर कोई तीसरा पक्षीय दावा, कोर्ट कुर्की या विवाद दर्ज नहीं है।